भारत में फुटबॉल के शुरुआती दौर को जानें
उन्नीसवीं सदी में ब्रिटिश सैनिकों ने कोलकाता में फुटबॉल का बीज बोया। मोहन बागान ने 1911 में IFA शील्ड जीतकर भारतीय फुटबॉल को एक अलग पहचान दी — यह जीत केवल खेल की नहीं, आत्मसम्मान की थी। इसके बाद ईस्ट बंगाल और मोहम्मडन SC जैसे क्लबों ने कोलकाता को फुटबॉल का गढ़ बनाया। 1950 में भारत FIFA विश्व कप के लिए क्वालीफाई
भी हुआ था। दक्षिण में गोवा और केरल ने अपनी अलग फुटबॉल संस्कृति गढ़ी, जो आज ISL में साफ दिखती है। सूरत जैसे शहरों में भी युवा फुटबॉल का उत्साह बढ़ रहा है।